LALKITAB SURYA KHANA NO 9 ||LALKITAB KE SURYA KE PURANE UPAY||लाल किताब

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LALKITAB SURYA KHANA NO 9 LALKITAB KE SURYA KE PURANE UPAYलाल किताब
लाल किताब| LALKITAB KE SURYA KE PURANE UPAYO|लाल किताब
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LALKITAB OR SURYA KHANA NO 1
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LALKITAB OR SURYA KHANA NO 2
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LALKITAB OR SURYA KHANA NO 3
https://youtu.be/-CcvT4Q_Ios

LALKITAB OR SURYA KHANA NO 4
https://youtu.be/bpu7WnGEvx4

LAL KITAB OR SURYA KHANA NO 5
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LALKITAB OR SURYA KHANA NO 6
https://youtu.be/9Pl55ffmKjY

लाल किताब का महत्व
लाल किताब में जीवन के हर क्षेत्र में आने वाली मुसीबतों के अचूक और आसान उपाय बताए गए हैं। इस किताब में बताए गए उपायों का अमीर, गरीब व दूसरे सभी वर्ग के व्यक्ति बहुत ही आसानी से पालन कर सकते हैं। इस किताब में वैदिक ज्योतिष से इतर कुंडली के सभी भावों के स्वामी ग्रहों के बारे में ना बताकर हर भाव के एक निश्चित स्वामी ग्रह के बारे में बताया गया और इसी के आधार पर ये ज्योतिषीय गणना कर जातक को भविष्यफल प्रदान करती है। इस किताब में बारह राशियों को बारह भाव माना गया है और उसी के आधार पर फलों की गणना की गयी है। लाल किताब में दिए उपायों को आमतौर पर दिन के समय ही करने से ही समस्या का निदान होता है। उपायों को करने से पहले अपनी कुंडली का विश्लेषण निश्चित रूप से करवा लेना चाहिए। लाल किताब में मुख्य रूप से जातक के पारिवारिक, आर्थिक, स्वास्थ्य, कार्य क्षेत्र, व्यापार, शादी, प्रेम और शिक्षा के क्षेत्र में आने वाली समस्याओं के उपाय बताए गए हैं। हर व्यक्ति की कुंडली में मौजूद ग्रह नक्षत्र का प्रभाव अलग-अलग पड़ता है और उसके अनुसार ही इस किताब में व्यापक प्रभावी उपायों के बारे में बताया गया है।

पंडित रूप चंद्र जोशी ने लाल किताब को निम्लिखित पांच भागों में विभाजित किया है :-
लाल किताब के फरमान : लाल किताब के इस प्रथम भाग को साल 1939 में प्रकाशित किया गया था।
लाल किताब के अरमान : इस किताब के द्वितीय भाग को 1940 में प्रकाशित किया गया।
लाल किताब (गुटका) : साल 1941 में लाल किताब के इस तीसरे भाग का प्रकाशन हुआ था।
लाल किताब : इस किताब के चौथे भाग को 1942 में प्रकाशित किया गया था।
लाल किताब : लाल किताब के पांचवें और आखिरी संस्करण को साल 1952 में प्रकाशित किया गया।
लाल किताब ने आम लोगों के लिए भी ज्योतिषशास्त्र को समझना बेहद आसान बना दिया। इसके प्रयोग से अपने आसपास की परिस्थितियों का आकलन करते हुए आप अपनी कुंडली में मौजूद ग्रह दोषों के बारे में जान सकते हैं और उसका उपाय कर सकते हैं।

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