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जन्मकुंडली के अष्टम भाव में स्थित ग्रह अपने प्रकृति स्वभाव के तहत पीड़ा का मूल कारण बनते हैं । अष्टम में स्थित ग्रह के दुष्प्रभाव से बचने हेतु उस नियत ग्रह से सम्बंधित उपासना पर ध्यान देनी चाहिए । जन्मकुंडली जो हमारे जीवन के कालपुरुष के रूप में होती है जो जीवन के भविष्य की रूपरेखा को इंगित करती है और जन्मकुंडली के अष्टम भाव जो मृत्यु भाव के रूप में जानी जाती है अर्थात अष्टम भावगत ग्रह से सम्बंधित परिक्षेत्र , विषय, प्रकृति , स्वभाव के सापेक्ष सतर्क रहें व स्वयं को उससे दूर रहें ।
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जन्मकुंडली के अष्टम भाव में स्थित ग्रह अपने प्रकृति स्वभाव के तहत पीड़ा का मूल कारण बनते हैं । अष्टम में स्थित ग्रह के दुष्प्रभाव से बचने हेतु उस नियत ग्रह से सम्बंधित उपासना पर ध्यान देनी चाहिए । जन्मकुंडली जो हमारे जीवन के कालपुरुष के रूप में होती है जो जीवन के भविष्य की रूपरेखा को इंगित करती है और जन्मकुंडली के अष्टम भाव जो मृत्यु भाव के रूप में जानी जाती है अर्थात अष्टम भावगत ग्रह से सम्बंधित परिक्षेत्र , विषय, प्रकृति , स्वभाव के सापेक्ष सतर्क रहें व स्वयं को उससे दूर रहें ।
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